सबसे बड़ा विमान बनाने का दावा करने वाली स्केल्ड कंपोजिट्स इंजीनियरिंग ने इसका शनिवार को सफल परीक्षण किया.

दुनिया का सबसे बड़ा विमान बनाने का दावा करने वाली स्केल्ड कंपोजिट्स इंजीनियरिंग ने इसका शनिवार को सफल परीक्षण किया. इस विमान को स्ट्रैटोलॉन्च नाम दिया गया है. यह परीक्षण कैलिफोर्निया में किया गया. इस दौरान करीब ढाई घंटे तक इस विमान ने मोजावे रेगिस्तान के ऊपर उड़ान भरी. इस दौरान विमान ने 189 मील प्रति घंटा (लगभग 304.16 किमी. प्रति घंटा) की रफ्तार पकड़ी. वहीं यह करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई तक गया. कंपनी के अनुसार यह अभी विमान का परीक्षण था लेकिन इसकी क्षमताएं इससे भी अधिक हैं. विमान और भी ऊंचाई तक जा सकता है, वहीं इसकी गति भी अभी सीमित रखी गई है. भविष्य में होने वाले परीक्षणों में इसकी पूर्ण क्षमताओं को परखा जाएगा.

 दो फुटबॉल मैदान से भी ज्यादा है इसके पंखों का फैलाव. जिनकी चौड़ाई करीब 385 फीट है.

 इसमें छह बोइंग 747 इंजन लगे हैं. जिसकी मदद से यह तेजी से टेकऑफ करने और अधिक ऊंचाई तक जाने में सक्षम है.

यह डुअल बॉडी का एरोप्लेन है, जो आपस में जुड़ी हुई है.

फिलहाल इसका इस्तेमाल केवल साइंटिफिक प्रोजेक्टस के लिए किया जाएगा लेकिन कंपनी का यह मानना है आने वाले समय में कमर्शियली भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

पहली बार इस विमान को मई 2017 में देखा गया था. उस दौरान उसके ग्राउंड टेस्ट किए गए थे, जिस दौरान इसे रनवे पर लगभग उसी स्पीड में दौड़ाया गया जितने में टेकऑफ करना था.

स्ट्रैटोलॉन्च बनाने का मुख्य मकसद रॉकेट और उपग्रहों को अंतरिक्ष में उनकी कक्षा तक पहुंचाने में मदद करना है. अब तक उपग्रहों को रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष में भजा जाता था जो काफी खर्चीला था और इसमें समय भी काफी लगता था. लेकिन स्ट्रैटोलॉन्च की मदद से इसका खर्च भी काफी कम आएगा और यह समय भी बचाएगा. साथ ही इसके जरिए सफर करना आसान व सुरक्षित होगा. वहीं सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए किसी एक साइट पर ही निर्भर नहीं रहना होगा. दुनिया भर के कई एयरपोर्ट इस विमान के टेकऑफ और लैंडिंग के लिए उपयुक्‍त हैं.

 स्ट्रैटोलॉन्च एक बार में तीन सैटेलाइट तक ले जा सकता है. यह रॉकेट के साथ इसके विंग के बीच में अटैच की जाएंगी.

 35 हजार फीट की ऊंचाई पर इन रॉकेट्स को शुरू किया जाएगा और वे अपनी कक्षा की ओर बढ़ जाएंगे.

 यह विमान करीब 5,89,676 किलोग्राम वजन अपने साथ लेकर उड़ने में सक्षम होगा.

माइक्रोसॉफ्ट के को- फाउंडर पॉल जी एलन ने स्केल्ड कंपोजिट्स इंजीनियरिंग कंपनी की स्‍थापना 2011 में की थी. पॉल ने इस विमान को बनाने का सपना देखा था, लेकिन 2018 में उनकी एक जानलेवा बीमारी के चलते उनकी मौत हो गई थी. उन्होंने ही इस प्लेन का डिजाइन तैयार किया था. कंपनी के चीफ एग्जीक्यूटिव जीन फ्लॉयड ने कहा कि यह मेरे लिए एक भावुक क्षण था, मैं पॉल का सपना पूरा होते देख रहा था लेकिन उसके सपने ही आसमान में उड़ती हकीकत देखने के लिए वह नहीं है.

बोइंग भी इसी तर्ज पर एक कमर्शियल विमान का निर्माण कर रही है. बोइंग के अनुसार यह 777-9 एक्स जेटलाइनर होगा जिसमें फोल्डिंग विंग्स लगे होंगे. इसके विंग्स करीब 235 फीट के होंगे. कंपनी का दावा है कि यह सबसे बड़ा दो इंजन वाला जेटलाइनर होग. कंपनी ने बताया कि सइका परीखण 2020 में होगा.

इससे पहले दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हॉवर्ड हग्स नामक विमान प्रयोग में लिया जाता था. जिसमें आठ इंजन लगाए गए थे. यह विमान अब एक म्यूजियम में है. इसके विंग का फैलाव करीब 320 फीट था लेकिन यह सिर्फ 219 फीट लंबा ही था. इसके साथ ही एंटोनोव एएन 225 कॉर्गो प्लेन में भी काफी बड़ा है. इसमें छह इंजन हैं और इसके विंग का फैलाव करीब 275.5 फीट है. वहीं बोइंग 747-8 प्लेन के विंग का फैलाव करीब 250 फीट है.

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