मोदी के गढ़ काशी पर चढ़ाई प्रियंका गांधी

लोकसभा चुनाव में मतदान से पूर्व काँग्रेस पार्टी की महासचिव एवं प्रभारी पूर्वांचल, श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा के देशव्यापी दौरों ने राजनीतिक हलकों में एक नये तरह की हलचल पैदा कर दी है। लोगों को उनमें पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की छवि दिखाई पड़ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि प्रियंका गांधी का आगमन काँग्रेस पार्टी में नयी जान फूकने का काम तो कर ही रहा है ,साथ ही सत्ताधारी भजपा पार्टी के जीत के फ्लेवर को कम कर कर सकता है,जो उसके लिए घातक होगा।

इसलिए क्योंकि आज कल जीत-हार का अंतर बहुत कम होता है । चुनावी रणनीति के तहत काँग्रेस के रणनीतिकारों ने प्रियंका गांधी को पहले नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात भेजा और अब गंगा नदी के रास्ते प्रयागराज(इलाहाबाद)के संगम से विंध्याचल (मिर्जापुर) होते हुए वाराणसी(काशी) तक दौरा कराने का कार्यक्रम तय कर दिया है।

यानि चुनाव के दौरान दूसरा राजनीतिक हमला नरेंद्र मोदी के चुनाव क्षेत्र पर। यह तो नमो गंगे के नरेंद्र मोदी के हथियार से उन्हीं को मात देने की अचूक योजना लग रही है। सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी की लोकसभा की अपनी सीट की विजय के लिए मिर्जापुर जनपद को साधा है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के माध्यम से मिर्जापुर के विकास के सारे दरवाजे खोल रखे थे।

लगता है काँग्रेस पार्टी के चुनावी रणनीतिकार इस बात को पकड़ लिए हैं, तभी प्रियंका गांधी को सीधे बनारस में न उतार कर गंगा नदी के रास्ते मतदाताओं की एक लम्बी बेल्ट में उथल-पुथल मचाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। वैसे भी मिर्जापुर के लोगों मेंं विशेष रूप से महिलाओं में प्रियंका गांधी को देखने की उत्सुकता से पता लग रहा है कि वह मतदाताओं को प्रभावित करेंगी। प्रियंका गांधी के दौरे के घोषित कार्यक्रम के अनुसार वे 18 मार्च को शाम पाँच बजे विंध्याचल (मिर्जापुर) पहुँचेंगी और 20 मार्च को चुनार(मिर्जापुर) से वाराणसी के लिए प्रस्थान करेंगी।

यहाँ के लोगों से मिलने-जुलने के उनके इस लम्बे कार्यक्रम से समझा जा सकता है कि काँग्रेस पार्टी मिर्जापुर जनपद को चुनावी राजनीति की दृष्टि से कितना महतुवपूर्ण मान कर चल रही है। ठीक उसी तरह जैसा दाँव नरेंद्र मोदी ने चला था। ज्ञातहो कि यहाँ के लोग डकैत रही फूलन देवी को दो बार संसद के लिए चुन चुके हैं। उसके पश्चात महिला होने का लाभ अनुप्रिया पटेल को मिला और वह सांसद बनीं। इससे लगता है कि यहाँ की महिला मतदाता चुनाव का रुख मोड़ सकती हैं। हो सकता है काँग्रेस पार्टी महिलाओं में घुसपैठ बनाने की योजना पर चल रही हो। तभी तो पिंयंका गांधी मिर्जापुर को इतना समय दे रही हैं।

यह भी ध्यान देने की बात है कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जब चुनाव हार गयी थी तब उन्होंने यहाँ माँ विंध्यवासिनी के मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ नंगे पाँव त्रिकोण भी किया था। इसके पश्चात हुए चुनाव में वह फिर सत्ता में आ गयी थीं। हो सकता है प्रियंका गांधी भी विशेष पूजा करें। वैसे उनके कार्यक्रम में माँ विंध्यवासिनी सहित गंगा के किनारे के कुछ खास मंदिरों में दर्शन-पूजन शामिल है। यह तो साफ है कि लोकतंत्र में मतदाता के मन को जो अपने पक्ष में कर ले उसी की जीत तय है। प्रियंका गांधी का नया चेहरा लेकर काँग्रेस पार्टी चुनाव में उतरी है। मतदाता इसे किस रूप में लेते हैं यह तो समय बतायेगा। फिर भी नेहरू परिवार की इस नयी पीढ़ी को लेकर सामान्य आदमी में उत्सुकता है और चुनावी उथल-पुथल की स्थिति का अंदाजा लगने लगा है

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