ओ स्त्री कल फिर आना

“ओ स्त्री कल फिर आना”

  • क्योंकि जब कल आप आई थी एक माँ के रूप मे तभी मै यह दुनियाँ देख पाया।
  • जब आपने अपने सुख दुःख को भुला कर, अपने तन का दूध पिला कर मेरा पालन किया तभी मै काबिल बन पाया।
  • जब आपने एक बहन के रूप मे मेरा खेल खिलौनो से लेकर दुनियाँ के झंझावातों से लड़ने मे साथ दिया तभी मै दुनियाँ के रक्षक के रूप मे स्थापित हो पाया|
  • जब आप एक पत्नी के रूप मे मेरे जीवन मे आई और हर कदम पर साथ निभाया तभी मै सफलता की ऊचाइयों को छू पाया।
  • जब एक बेटी के रूप मे आपके कदम मेरे आँगन मे पड़े तभी मेरे जीवन की सार्थकता हुई और मैने पिता की उच्च पदवी प्राप्त किया।
  • जब आप एक प्रेमिका और मित्र के रूप मे मेरे हृदय मे विराजमान हुई तभी मै दुनियाँ के सभी दर्द भूल कर प्रेम के उच्च शिखर को प्राप्त कर कृष्ण बन पाया।
  • मेरी हर भूल को भुला कर आपने जीवन के हर सफर मे साथ दिया,तभी मेरे जीवन की सार्थकता सिद्ध हुई और मै आपका ही स्वामी होने का भ्रम रख पाया।
  • आपके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए यह एक दिन तो क्या मेरा यह संपूर्ण जीवन भी पर्याप्त नही है।
  • जिस तरह आप आज तक अपने प्रत्येक रूप मे अपना असीम प्यार और स्नेह देने के लिए मेरे जीवन मे आई उसी तरह “ओ स्त्री कल फिर आना” ।

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