नवरात्र  यानि आदि शक्ति के नौ दिन

नवरात्र यानि आदि शक्ति के नौ दिन और वो नौ रातें जो केवल मां दुर्गा को ही समर्पित हैं। इन नौ दिनों में दिन हो या रात केवल देवी दुर्गा की ही आराधना की जाती है। देवी के अलग अलग 9 रूपों की पूजा अर्चना और भक्ति को ही समर्पित हैं नवरात्र के ये नौ दिन।

शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री हर दिन इन नौ देवियों की ही पूजा का विधान है नवरात्र में। साल में यू तो चार नवरात्र होते हैं। जिनमें से 2 गुप्त नवरात्र होते हैं जिनके बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते तो वही 2 और नवरात्र चैत्र और शरद महीने में आते हैं। शारदीय नवरात्र जहां अक्टूबर महीने में आते हैं तो वही चैत्र नवरात्र हर साल अप्रैल महीने में होते हैं जिनका अब जल्द ही आगाज़ होने जा रहा है।

साल 2019 में चैत्र नवरात्र का आगाज़ होने जा रहा है 6 अप्रैल से यानि इसी हफ्ते के शनिवार से। शनिवार को पहला नवरात्र मनाया जाएगा और पहले दिन मां दुर्गा की पहली शक्ति देवी शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाएगी।

कलश स्थापना का क्या है मुहूर्त

वही नवरात्र के पहले दिन ही कलश स्थापना का विधान है। लेकिन कलश स्थापना भी लोग शुभ मुहूर्त में ही करते हैं। वही चैत्र नवरात्र 2019 के कलश स्थापना के शुभ समय की बात करें तो आप सुबह 6.09 बजे से लेकर 10.19 बजे तक कलश स्थापित कर सकते हैं।

नवरात्र प्रथम – शैलपुत्री
नवरात्र द्वितीय – ब्रह्मचारिणी
नवरात्र तृतीय – चंद्रघंटा
नवरात्र चतुर्थी – कुष्मांडा
नवरात्र पंचमी – स्कंदमाता
नवरात्र षष्ठी – कात्यायनी
नवरात्र सप्तमी – कालरात्रि
नवरात्रि अष्टमी – महागौरी
नवरात्र नवमी – सिद्धिदात्री

नवमी पर बाल कन्याओं की होती है पूजा

वही नवमी पर खास तौर से बाल कन्याओं की पूजा की जाती है और उन्हे हलवे, पूरी का भोग लगाकर नवरात्र व्रत का उद्यापन किया जाता है।

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