गौरैया नहीं रही तो हम सबको लगाना होगा ऑक्सीजन मास्क

आज विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर समाजिक संस्था विन्ध्य सेवा मंच के द्वारा विन्ध्याचल के शेरकोठी में गौरैया संरक्षण पर कवियों के माध्यम से एक शाम गौरैया के नाम के साथ एक विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ साथ ही संस्था द्वारा गौरैया मित्र बनाओ अभियान के अंतर्गत बड़ी संख्या में लोगो को गौरैया मित्र बनाया गया । इस अवसर पर कवियों ने अपनी अपनी रचना प्रस्तुत की

सर्व प्रथम कवि इरफान कुरेशी ने अपनी रचना

“उसकी चंचलता ही बताती है कि गौरैया है सुबह सुबह जो हमें उठाती है वही गौरैया है”
तो कवि खुर्शीद भारती ने गौरैया ने अपना घर मेरे घर में बनाया है सुना कर लोगो को भाव विभोर कर दिया वहीं कवि आनन्द’अमित ने अपनी रचना प्यारी गौरैया वो अब नहीं दिखती,

अपनी नन्हीं चोंच से तिनका लाते हुए, सुना हकीकत का एहसास कराया तो कवि सूर्य नारायण शुर ने आओ कदम बढाये हम सब, गौरैया की ओर। सुना लोगो को प्रेरित किया तो गौरैया संरक्षक कवि त्रियोगी मिट्ठू मिश्र ने अपनी रचना धूल में लोट कर बताये गौरैया घूम घूम के घिर आई बदरिया बरसी झूम झूम के सुना लोगो को इस चिड़िया की अहमियत का एहसास कराया।

इस अवसर पर संस्था महासचिव जादूगर रतन कुमार द्वारा इस चिड़िया से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गयी साथ ही संस्था द्वारा निर्मित घोषलो का भी प्रदर्शन किया गया जिसे संस्था द्वारा सिर्फ गौरैया चिड़िया के लिए डिजाइन किया गया है इसमें कोई अन्य पक्षी अपना घोसला नहीं बना सकती साथ ही इस घोसले में गौरैया कम तिनके लाकर अपना घोंसला बना लेती है और इस घोसले के बहार बने प्लेटफॉर्म पर बैठ कर आसानी से अपने बच्चे को दाना चुँगा सकती है और इसके साफ सफाई के लिए ऊपर से खोलने की भी व्यवस्था की गयी।इस प्रकार संस्था द्वारा निर्मित घोसला गौरैया फ्रेंडली बनाया गया है।

कार्यक्रम के अंत में गौरैया पर प्रकास डालते हुए गौरैया संरक्षक त्रियोगी मिट्ठू मिश्र ने कहा की गौरैया नहीं बची तो हम सबको भविष्य में ऑक्सीजन मास्क लगाना होगा ।मिश्र ने कहा गौरैया है तभी सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले दो पेड़ धरा पर मौजूद है बरगद और पीपल । गौरैया जब बरगद पीपल के फल को खाती है और उसे अपने पाचन तंत्र से गुजार कर बीट करती है तो ही इन वृक्षों का अंकुरण होता है ।

इस लिये हम बरगद पीपल को बचाने के लिये गौरैया पक्षी को बचाने की अपील कर रहें हैं ताकि हमारे धरा पर ऑक्सीजन की कमी न हो साथ ही मिट्ठू मिश्र ने कहा की गौरैया को अपने निवाले में से दें दो चार दाना अपने घरों में बनाइये इनके लिये एक छोटा सा आशियाना ताकि हमारे आने वाले बच्चे किताबों में नहीं हकीकत में देख और सुन सके इनका चहचहाना।इस अवसर पर डॉक्टर अभिषेक मिश्र सुरेन्द्र शुक्ल कमल गुप्ता मानस मिश्र सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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