पे एंड स्‍टे केस: का मामला US में आठ भारतीय छात्रों ने कोर्ट के समक्ष पेश किया बेगुनाही के सबूत!

*वाशिंगटन ।* अमेरिका में फर्जी दाखिला और अवैध रूप से रहने के लिए विदेशी छात्रों की गिरफ्तारी के बाद आठ भारतीय छात्रों ने मिशिगन की एक संघीय अदालत में याचिका दायर की है। इन छात्रों ने संघीय कोर्ट में दोषी नहीं होने की दलील दी है।

इस घटना के बाद अमेरिका में ‘पे टु स्टे’ वीजा रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद भारतीयों समेत कई विदेशियों पर उनके देश वापस भेजे जाने की तलवार लटक गई है। बता दें कि याचिका दायर करने वाले एक 35 वर्षीय छात्र कर्णावती भी हैं, जिन्‍हें सोमवार को 10,000 अमेरिकी डॉलर के बांड पर रिहा किया गया है। वह एच-1 बी वीजा के साथ अमेरिका आए थे और लुइसविले में रहते हैं।

याचिका दाखिला करने वाले अन्‍य अन्य लोगों में बैराठ काकीरेड्डी, सुरेश कांडला, प्रेम रामपीसा, संतोष सामा, अविनाश थक्कालापल्ली, अश्‍वंत नुणे और नवीन प्रतिपति हैं। गत सोमवार को सीमा शुल्क प्रवर्तन (आइसीइ) ने अपने राष्‍ट्रव्‍यापी आव्रजन ऑपरेशन में डेट्रोइट, फ्लोरिडा और वर्जीनिया से 130 छात्रों को हिरासत में लिया था। इनमें से 129 भारतीय छात्र थे। दरअसल, छात्रों ने बिना क्लास में हाजिर हुए छात्र वीसा पर रुकने के लिए भुगतान किया, इसलिए इसे ‘पे टू स्टे’ घोटाला कहा जा रहा है। कर्णावती के वकील जॉन डब्ल्यू ब्रुस्टार ने एक समाचार एजेंसी को बताया कि याचिकाकर्ताओं ने संघीय सरकार पर एक स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम देकर लोगों को फंसाने का आरोप लगाया है। उन्‍होंने कहा कि कर्णावती को छोड़कर बाकी अन्‍य सात भारतीय छात्रों पर फर्जी दाखिले के लिए आपराधिक मामला दर्ज है। ब्रुसस्टार ने कहा कि कर्णावती को उनके अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड के कारण जमानत पर रिहा किया गया है। वह पेशे से सूचना प्रौद्योगिकी इंजीनियर हैं। दस साल पहले वह एच-1 बी वीजा पर अमेरिका आए थे। उन्‍होंने कहा कि अगर कर्णावती समेत इन सात लोगों को दोषी ठहराया जाता है तो सबको पांच साल तक की कैद का सामना करना पड़ सकता है। गौरतलब है कि उन पर विदेशी नागरिकों को डेट्रॉयट के फार्मिंगटन हिल्स में एक फर्जी विश्वविद्यालय में दाखिला दिलाकर उन्हें अवैध रूप से अमेरिका में ठहराने में मदद पहुंचाने का आरोप है।

होमलैंड सुरक्षा के विशेष जांच एजेंट एक गुप्त अभियान के तहत डेट्रॉयट से यह विश्वविद्यालय चला रहे थे, जिसकी साजिशकर्ताओं को भनक तक नहीं लगी। इस विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर खासकर दाखिलों के संदर्भ में डाली गई सूचनाओं में काफी कुछ गड़बड़झाला था। साथ ही आइसीइ ने इस फर्जी विश्वविद्यालय के विदेशी विद्यार्थियों को हिरासत में लेना शुरु कर दिया और उनके उनके देश भेजने की प्रक्रिया शुरु कर दी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

scroll to top