सरकार की सारी योजनाओं से परे, दिव्यांग “गुरु मांझी” दिखा रहे हैं समाज और सरकार को आईना

रामलाल साहनी* की रिपोर्ट

विन्ध्याचल स्थित तिवारीपुर बस्ती के गुरु मांझी एक आंख से एकदम से दिव्यांग और दूसरे आंख से मात्र थोड़ा सा दिखाई देता है इस थोड़ी सी रोशनी से अपने परिवार और समाज के लिए कर रहे है, हाड़ तोड़ मेहनत।

न जाने कितने सरकारें आयी और गयी पर इनके तरफ किसी का भी ध्यान नहीं गया जी हां सरकार की सारी योजनाओं से विरक्त इस जाबांज ने अपने कार्यो और कड़ी मेहनत के बलबूते न सिर्फ सरकार को बल्कि इस मौकापरस्त समाज को आईना दिखाने से पीछे नहीं हटते।

आज भी सभी योजनाओं से विरक्त है गुरु मांझी। जहां लोगों को रुपए की भूख ने अपने अपनों से अलग कर रखा है, इतनी भागदौड़ की जिंदगी में लोग खुद के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं, ऐसे में यदि समाज में कुछ महान व्यक्तित्व के लोग अपने जज़्बा और जोश तथा लगन से दूसरों के जीवन को खुशहाल और सरल बनाने का कार्य करते हैं तो ऐसे लोगों के लिए उनकी जोश और जज्बा को सलाम देने वालों की कमी नहीं रहती।

जैसे दशरथ मांझी पूरे पर्वत को हथौड़ी और छेनी से पर्वत को काटकर रास्ता बना दिया। उसी प्रकार से कुछ जज्बा लेकर के *गुरु मांझी (निषाद)* जब जून की कड़ी धूप लू के थपेड़ों में हम और आप घर से बाहर नहीं निकलते और जब पूस की भयंकर ठंड में हम और आप रजाई के अंदर दुबक कर बैठे रहते है।

उस समय यह शख्स अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए हाड़ तोड़ मेहनत करता है। गुरु निषाद आज से करीब 25 वर्षों से गंगा घाट को खाईं से समतल बनाने और मां गंगा का जलस्तर जब नीचे जाता है तो सभी घाटों पर दलदल मिट्टी जम जाता है तो इससे लोगों को और जानवरों को पानी पीने और स्नान करने तथा कई कार्यो में रुकावट होने लगता है ऐसे में यह शख्स दलदल की मिट्टी को हटाकर घाटों की खाई को काटकर उसे लेवल में करना और मां गंगा के जल के अंदर के दलदल को और धसान को पैर से और हाथ से हटा कर लोगों की जिंदगियों को बचाना और गंगा स्नान करने वाले यात्रियों को तथा ग्राम वासियों की जिंदगी को सरल बनाना और बिना कोई परेशानी से सबको गंगा स्नान हो जाए तथा किसी भी परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना ना घटे इसके लिए बिना किसी लाभ के दूसरों की सेवा में सदैव तत्पर रहते हैं।

ऐसे समाजसेवी के लिए हमें गर्व है और उनके इस कार्य से लोगों को बहुत प्रेरणा मिलता है। आज पूरे गांव में लोग यह कहते नहीं थकते कि हां गुरु मांझी 25 वर्षो दे लोगों को बेहतर सुविधा देने के लिए बहुत कड़ी मेहनत करते है।
*इनके जज़्बे को सालम* 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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