हमारा जीवन और जीवन शैली

*आज के युग मे वैकल्पिक चिकित्सा का महत्व*
सर में थोड़ा सा दर्द, एक गोली ले लिया और दर्द गायब। पेट मे दर्द, एक गोली लिया आउट दर्द में तुरंत आराम। तबियत खराब हुई और एन्टी बायोटिक गोली खाई और आराम मिल गया। शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द हुआ गोली खाई और आराम हो गया, कुछ समय बाद तबियत ज्यादा खराब हुई तो पता चला कि दर्द में जो दवा खाई थी उसका दुष्प्रभाव है। ज्यादा दर्द की दवा खाने से किडनी में इन्फेक्शन हो गया और उम्र भर डायलीसिस और कभी भी मौत हो सकती है। हमारा जीवन दिन पर दिन पूर्णतः अंग्रेज़ी दवाइयों पर निर्भर होता जा रहा है, हर छोटी सी समस्या पर दवा, ये जानने के बावजूद की अंग्रेजी दवाओं के एक नही अनेक दुष्प्रभाव होते है। इन दवाओं को उलट चिकित्सा (reverse therapy) भी बोला गया है क्योंकि यह समस्याओं का तुरंत समाधान तो कर देती है परंतु आगे समय मे गंभीर बीमारी भी दे जाती है। भारत और अमेरिका की अनेक अनुसंधान से यह पता चला है कि 95% रोगों का कारण शारीरिक नही बल्कि भावनात्मक और मानसिक है और कुछ हद तक हमारी जीवनशैली व खानपान है। सभी अच्छी तरह से जानते है कि चिकित्सक मानसिक और भावनात्मक रोगों का उपचार नही कर सकता, इनका उपचार मात्र परामर्श से और नींद के गोली से किया जाता है। अगर हम अपने प्राचीन उपचार पद्यतियों की तरफ जाए तो हर रोगों का स्थायी उपचार तो है पर सही औषधि मिल पाना लगभग असंभव के बराबर है। तत्पश्चात अगर हम ऐसे विद्या के बारे में बात करे जिसमे न तो दवा देनी हो और न तो कही किसी को छूना हो तो कितना अच्छा हो। जी हां, ऐसी विद्या है जो बिना छुए और बिना दवा के की जाती है और कई नामो से भी जानी जाती है जैसे: प्राण हीलिंग, प्राणशक्ति उपचार, रेकी, योग प्राण विद्या, औरा हीलिंग इत्यादि। इन सभी चिकित्सा पद्यतियो को वैकल्पिक चिकित्सा भी कहा जाता है क्योंकि इस चिकित्सा को एलोपैथी इलाज से साथ साथ चलाया जा सकता है क्योंकि एलोपैथी चिकित्सा हमारे शारीरिक समस्यओं का उपचार करती है और साथ साथ वैकल्पिक चिकित्सा हमारे भावनात्मक और मानसिक रोगों का उपचार करती है और सबसे इत्मीनान देने वाली बात ये है कि वैकल्पिक चिकित्सा के माध्यम से हम अंग्रेजी दवाओं के होने वाले दुष्प्रभावो को काफी मात्रा में कम कर सकते है। अमेरिका के सी बी एस न्यूज़ के मुताबिक अमेरिका में बड़े अस्पताल के चिकित्सक भी बड़ी मात्रा में वैकल्पिक चिकित्सा को सीख रहे है और मरीजो का एलोपैथी और वैकल्पिक चिकित्सा के माध्यम से जल्दी और सफल उपचार भी कर रहे है। हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भी 2014 में बैंगलोर के एक मेडिकल चिकित्सको के सेमिनार में औरा हीलिंग का वर्णन किया था और देश विदेश में जो रहे सफल उपचार और अनुसंधानों के बारे में भी बताया था। हमारे भारत देश मे भी लगभग 150 अलग अलग प्रकारों के वैकल्पिक चिकित्सा का सफलतापूर्वक अभ्यास किया जा रहा है और कई निजी व समाजसेवी संस्थान इसपर अनुसंधान में भी लगी हुई है जो कि मात्र इस विषय पर खोज कर रही है कि अपनी जीवनशैली और विचारों को बदल कर कितने रोगों से दूर रह सकते है और रोगियों का सफल उपचार कर सकते है। ऐसे ही स्टडीज ऑफ इनर साइंसेस ट्रस्ट नाम की संस्था जो कि बिना किसी निजी लाभ के वाराणसी शहर में कार्यरत है जो कि वैकल्पिक चिकित्सा पर अनुसंधान करती है और मात्र ही ट्रस्ट के खर्च के मूल्य में चिकित्सा अभ्यास, चिकित्सा को सिखाने का कार्य कर रही है। मात्र 2 वर्ष की उम्र की ट्रस्ट ने देश के कई शहरों में अपनी शाखाएं खोली है और इसके चिकित्सको टीम ने कई शारीरिक, भावनात्मक, व मानसिक रोगों से प्रभावित लोगों का सफलतापूर्वक उपचार किया है। वैकल्पिक चिकित्सा के प्रभाव से लोगो की जीवनशैली सकारात्मक दिशा की ओर जा रही है, और रोगों पर रोकथाम लग रहा है। इस चिकित्सा पद्धति से जुड़ने वाले लोग अपने जीवन के हर पहलू को सकारात्मक रूप से जी रहे है और वो पा रहे है जिसके लिए मनुष्य सारा जीवन व्यतीत कर देता है और वो है “प्रेम और आनंद”।
पुष्पराग जौहरी उपचारक व प्रशिक्षक स्टडीज ऑफ इनर साइंसेस ट्रस्ट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

scroll to top