अद्भुद अद्वितीय अकल्पनीय

प्रयागराज कुम्भ
इस पृथ्वी पर जहाँ मनुष्य अंधेरे से प्रकाश पाकर मुक्ति के द्वार पर पहुँच पाता है उस रास्ते का नाम ही आस्था है। जहाँ तर्क होता है वहाँ आस्था नही होती। आस्था सदैव विश्वास पर ही टिकी होती है और ईश्वर के प्रति विश्वास ही मुक्ति का द्वार है।
उसी आस्था और मुक्ति के द्वार हमें ईश्वर से करीब होने का अहसास दिलाता है।
प्रयाग में लगा कुंभ इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। एक तरफ नागा बाबाओं की टोली कहाँ से आती है और कहाँ चली जायेगी ये कोई नही बता सकता ये आस्था ही है जो उन्हें संगम तट पर लाती है और फिर उन्हें शाही स्नान के बाद एक आस्था की शक्ति एक प्रकाश रूपी ताकत देती है जो उन्हें आगे तपस्या करने में बल देती है और वो उसी आस्था और विश्वास के साथ निकल जाते है ईश्वरीय प्रकाश की ओर।
यही है आस्था और विश्वास जो सदैव हमें और आपको ईश्वर का अहसास करवाता रहता है और हमें जीवित रहने की शक्ति देता है।
अतुल कुल वाराणसी से

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

scroll to top